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क्या योगी सरकार पिछली सरकारों से अलग है ? यूपी शासन का तुलनात्मक मूल्यांकन

January 17, 2026 | by gangaram5248@gmail.com

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शासन की गुणवत्ता का आकलन केवल सरकार बदलने से नहीं, बल्कि नीतियों, क्रियान्वयन और नागरिक अनुभव से होता है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों ने अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं के साथ शासन किया। 2017 के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने सख्त प्रशासन और तेज निर्णयों के साथ अलग पहचान बनाने का प्रयास किया। इसलिए यह प्रश्न प्रासंगिक है कि योगी सरकार वास्तव में कितनी अलग है और क्या वह जनता की अपेक्षाएँ पूरी कर पा रही है।

कानून-व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की सबसे बड़ी पहचान कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रवैया माना जाता है। संगठित अपराध, माफिया और अवैध कब्जों पर कार्रवाई ने प्रशासन की सक्रियता का संदेश दिया। पुलिस और प्रशासन को राजनीतिक संरक्षण से अपेक्षाकृत मुक्त रखने का दावा किया गया। हालांकि, एनकाउंटर नीति और मानवाधिकारों को लेकर आलोचनाएँ भी समानांतर रूप से सामने आईं।

कांग्रेस शासन के अंतिम वर्षों में कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा की कमी देखी गई। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अपराध और कमजोर पुलिसिंग की शिकायतें आम रहीं। कई घटनाओं ने राज्य की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। इस तुलना में योगी सरकार अधिक कठोर और परिणाम केंद्रित दिखती है।

मायावती सरकार में अपराध नियंत्रण के लिए प्रशासनिक सख्ती थी। पुलिस और अफसरशाही में भय का माहौल बनाकर नियंत्रण स्थापित किया गया। इससे अपराध पर कुछ हद तक अंकुश लगा, लेकिन जन–प्रशासन संबंध कमजोर हुए। योगी सरकार का मॉडल भय के बजाय दंड और सार्वजनिक संदेश पर अधिक आधारित माना जाता है।

शिक्षा
योगी सरकार ने स्कूलों की इमारत, डिजिटल बोर्ड, टैबलेट और छात्रवृत्ति पर ध्यान दिया। नई शिक्षा नीति के तहत कौशल और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की बात की गई। शिक्षक नियुक्ति और प्रशिक्षण में कुछ सुधार हुए हैं। फिर भी शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी स्कूलों पर विश्वास अभी भी बड़ी चुनौती है।

कांग्रेस और समाजवादी सरकारों में शिक्षा पर खर्च तो हुआ, लेकिन निगरानी कमजोर रही। समाजवादी सरकार की लैपटॉप योजना चर्चित रही, पर शिक्षा परिणाम सीमित रहे। मायावती शासन में शिक्षा सुधार प्रशासनिक प्राथमिकता नहीं बन पाया। इस तुलना में योगी सरकार का ढांचा बेहतर दिखता है, लेकिन परिणाम समान गति से नहीं आए हैं।

 

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
योगी सरकार ने एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, रेलवे आधुनिकीकरण और औद्योगिक कॉरिडोर पर तेज़ी से काम किया। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे ने क्षेत्रीय संतुलन का संकेत दिया। शहरी परिवहन और स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ आगे बढ़ीं। इससे राज्य की निवेश और विकास छवि मजबूत हुई है।

समाजवादी सरकार ने यमुना और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट दिए। मायावती सरकार का फोकस स्मारक और प्रतीकात्मक निर्माण पर अधिक रहा। ग्रामीण और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी अपेक्षाकृत कमजोर रही। इस क्षेत्र में योगी सरकार का दायरा और गति दोनों अधिक हैं।

सामाजिक योजनाएँ
योगी सरकार ने राशन, आवास, उज्ज्वला और पेंशन योजनाओं में तकनीक का प्रयोग बढ़ाया। डीबीटी के माध्यम से लाभार्थी तक पैसा सीधे पहुँचाया गया। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई। हालांकि डिजिटल प्रक्रिया से कुछ गरीब वर्गों के छूटने की शिकायतें भी आईं।

समाजवादी और कांग्रेस सरकारों में योजनाएँ थीं, लेकिन लीकेज की समस्या गंभीर रही। मायावती सरकार में योजनाओं का लाभ सीमित वर्गों तक केंद्रित होने का आरोप लगा। पारदर्शिता और ट्रैकिंग तंत्र कमजोर था। इस तुलना में योगी सरकार की डिलीवरी प्रणाली अधिक संरचित है।

भ्रष्टाचार और प्रशासन
योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” का दावा किया। ऑनलाइन टेंडर, ई-ऑफिस और निगरानी तंत्र को बढ़ावा दिया गया। कई मामलों में सख्त कार्रवाई के उदाहरण सामने आए। फिर भी, प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर पूर्ण संतोष अभी नहीं है।

कांग्रेस और समाजवादी शासन में राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें अधिक रहीं। मायावती सरकार में भ्रष्टाचार कम दिखा, लेकिन भय आधारित नियंत्रण था। संस्थागत पारदर्शिता विकसित नहीं हो पाई। योगी सरकार इस मामले में अपेक्षाकृत अधिक सिस्टम आधारित मानी जाती है।

 

पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
योगी सरकार ने नदी सफाई, वृक्षारोपण और प्रदूषण नियंत्रण पर योजनाएँ शुरू कीं। बाढ़, कोरोना और प्राकृतिक आपदाओं में प्रशासनिक प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत तेज रही। आपदा प्रबंधन संस्थागत रूप से मजबूत हुआ है। हालांकि शहरी प्रदूषण और जल संकट अभी भी गंभीर हैं।

पूर्ववर्ती सरकारों में पर्यावरण नीति प्राथमिकता सूची में नीचे रही। योजनाएँ तो बनीं, लेकिन क्रियान्वयन कमजोर रहा। आपदा प्रबंधन अधिकतर तात्कालिक प्रतिक्रिया तक सीमित था। इस क्षेत्र में योगी सरकार का ढांचा अधिक संगठित दिखाई देता है।

केंद्र–राज्य समन्वय और नीति क्रियान्वयन
योगी सरकार का केंद्र सरकार के साथ समन्वय मजबूत रहा है। केंद्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन अपेक्षाकृत तेज़ और प्रभावी हुआ। इससे संसाधन और परियोजनाएँ राज्य तक पहुँचीं। पूर्व सरकारों में यह समन्वय राजनीतिक मतभेदों से प्रभावित रहता था।

नागरिकों की अपेक्षाएँ
सुरक्षा, सड़क, बिजली और प्रशासनिक सख्ती को लेकर नागरिकों में संतोष बढ़ा है। निवेश और विकास की नई उम्मीद बनी है। सरकारी सेवाओं तक पहुँच पहले से आसान हुई है। इन क्षेत्रों में योगी सरकार अपेक्षाओं के क़रीब पहुँचती दिखती है।
रोजगार सृजन की गति अभी भी नागरिकों की अपेक्षाओं से कम है। सामाजिक संतुलन और समावेशन पर सवाल उठते रहते हैं। इन मुद्दों पर सरकार को अभी और काम करना है।

निष्कर्ष
योगी सरकार कई नीतिगत और प्रशासनिक पहलुओं में कांग्रेस, समाजवादी और मायावती सरकारों से स्पष्ट रूप से अलग दिखाई देती है। कानून-व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सख्ती इसकी मुख्य पहचान हैं। फिर भी शिक्षा गुणवत्ता, रोजगार और सामाजिक संतुलन में अपेक्षाएँ पूरी तरह पूरी नहीं हुई हैं। अंतिम रूप से कहा जा सकता है कि बदलाव दिशा में है, लेकिन मंज़िल अभी दूर है।

Author: Vichaardeep | Published: 18 Jan 2026 | Last Updated: 18 Jan 2026

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